अनीता वाजपेयी

वट सावित्री व्रत पर शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना की। पूजा के दौरान वट वृक्ष के फेरे लगाकर उनसे पति की लंबी उम्र मांगी गई। इस दौरान पहला व्रत रखने वाली युवतियों के साथ ही उनके परिवार की महिलाओं में उत्साह देखा गया। घर की बुजुर्ग महिलाएं दुल्हन की तरह सजाकर अपने घर की बहू को पूजन कराने ले गईं।

शुभ मुहूर्त होने के कारण सुबह से ही महिलाओं ने घर में तैयारी की और आंटे के मीठे प्रतीकात्म बरगद बनाने के साथ ही पूजा की अन्य सामग्री तैयार की और कुछ महिलाएं सुबह सात बजे बरगद के पेड़ के नीचे पूजा आऱाधना करने पहुंची तो कुछ ने पूजन के लिये अभिजीत मुहूर्त को चुना जो सुबह दस बजे के बाद लग रहा था। बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) के नीचे पूजा करने के लिये पहुंची सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना कर बरगद के पेड़ के फेरे लेने के बाद यहीं बैठकर बरगद का सेवन किया तो कई महिलाओं ने हमेशा सुहागिन रहने के लिये वट वृक्ष पर सुहाग का सामान चढ़ाकर पूजा की। पूजन कर लौटने के बाद अधिकांश सुहागिनों ने पति तथा बुजुर्गों के पांव छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
इसलिये की जाती है वट वृक्ष की पूजा

वट सावित्री हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है. इस व्रत को मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि के लिए करती हैं. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर ‘वट’ यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. इस व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने का विशेष विधान है।
वट वृक्ष मे होता है त्रिदवों का वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ में साक्षात त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। हिंदू धर्म में वट वृक्ष की जड़ों में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी, तनों में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु और शाखाओं में संहार के देवता भगवान शिव का निवास बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि बरगद के पेड़ की पूजा करने से एक साथ तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है और पति को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है.

‘अक्षय वट’ भी कहा जाता है
बरगद के पेड़ को ‘अक्षय वट’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह कभी पूरी तरह नष्ट नहीं होता. इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़ें जमीन में जाकर फिर से नए तने का रूप ले लेती हैं. कहा जाता है कि जिस प्रकार बरगद अपनी जड़ों के माध्यम से स्वयं को पुनर्जीवित करता रहता है, उसी प्रकार सुहागिन महिलाएं भी वट वृक्ष की पूजा कर यह कामना करती हैं कि उनका सौभाग्य और वंश भी इस पेड़ की तरह अखंड और विस्तृत बना रहे.
सावित्री और सत्यवान की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने अपने तप, समर्पण और बुद्धिमत्ता के बल पर उन्हें रोक लिया था. मान्यता है कि यह घटना एक बरगद के पेड़ के नीचे ही हुई थी. सावित्री ने वट वृक्ष की छाया में ही अपने मृत पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था. इसी स्मृति में महिलाएं बरगद के पेड़ के चारों ओर सूत का धागा लपेटकर अपने पति की लंबी आयु और रक्षा का संकल्प लेती हैं।
