पं, पवन तिवारी
शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। यह दिन शनि देव की कृपा प्राप्त करने, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए अत्यंत शुभ है।

ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पंडित पवन तिवारी का कहना है कि शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं लेकिन ये फल हमेशा मीठा नहीं होता। यही कारण है कि कई लोगों को शनिदोषों, जैसे कि साढ़े साती या ढैय्या में अत्यधिक कष्ट भोगना पड़ जाता है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। यह दिन शनि देव की कृपा प्राप्त करने, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन किए गए दान, स्नान, जप-तप और पितृ तर्पण से विशेष पुण्य मिलता है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। शनि देव न्याय और कर्मफल के देवता हैं, इसलिए इस दिन अनुशासन, सत्य और दान का पालन करना विशेष फलदायी है।
इस साल शनिश्चरी अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शनिश्चरी अमावस्या शनिवार के दिन यानि 16 मई को पड़ रही है, जो एक अत्यंत दुर्लभ संयोग है शनि जयंती भी इसी दिन है, जिसे शनिदेव के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। शनि देव का जन्मोत्सव और बट सावित्री व्रत एक साथ पड़ना अत्यंत दुर्लभ है। यह शुभ अवसर उन राशियों को विशेष रूप से राहत देने वाला है, जिनकी साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है। जैसे कि अभी कुंभ, मीन और मेष राशियों की साढ़ेसाती चल रही है और सिंह और धनु की ढैय्या चल रही है।
शांत होता है पितृदोष
शनिवार, शनि देव का दिन होता है और अमावस्या पितरों व कर्मों से जुड़ी होती है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं,तो शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम हो सकते हैं और इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और पूजा करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है। इस दिन काले तिल, तेल, उड़द दाल, काले कपड़े, चप्पल , छाता आदि का दान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में स्थिरता और सफलता बढ़ती है।
सरसों के तेल का दीपक जलाने से दूर होता शनि दोष
इस दिन सरसों के तेल से अभिषेक करने पर या सरसों के तेल का दीपक जलाने पर शनि दोष कम होता है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से शनि और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। इस दिन काले वस्त्र, तिल और लोहे का दान करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। इस दिन मानसिक शान्ति और ग्रह शान्ति के लिए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करना चाहिये और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।
