सरस वाजपेयी
मां की आराधना का प्रमुूख नवरात्रि पर्व इस बार 19 मा्रत ले शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त हैं अगर आप सुबह जल्दी उठ सकते हैं तो पूजा करने व कलश स्थापना के लिये सुबह 6.52 मिनट से सुबह 7.43 बजे तक शुभ मुहूर्त है इस अवधि में अगर पर कलश स्थापना नहीं कर पा रहे हैं तो कलश स्थापना के लिये दोपहर में अभिजीत मुहूर्त रहेगा जिसमें आप दोपहर 12.05 बजे से 12.53 बजे तक घर में कलश स्थापना कर सकते हैं।
19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि
ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित पवन तिवारी ने विभिन्न पंचांग का अध्यन करने के बाद बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रही। प्रमुख ज्योतिर्वि पंडित पवन तिवारी का कहना है कि इस साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण असंमजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रही है।
हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में एक है चैत्र नवरात्रि
चैत्र नवरात्रि को हिंदू धर्म के पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। पंचांग के अनुसार साल में कुल 4 नवरात्रि आती है जिसमें से दो चैत्र, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि पड़ती है। हर एक नवरात्रि का अपना-अपना महत्व है। ऐसे ही चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि तिथि से आरंभ होने वाली चैत्र नवरात्रि काफी खास है। इसके साथ ही इस दिन से हिंदू कैलेंडर के मुताबिक नया साल भी आरंभ होता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने का विधान है।
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को सुबह 6:52 बजे से आरंभ हो रही है, जो 20 मार्च को सुबह 4:51 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार से हो रहा है। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इन मुहूर्तों में घटस्थापना करना लाभकारी माना जाता है।
यह हैं कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त: सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
मीन लग्न प्रारंभ – मार्च 19, 2026 को 06:26 ए एम बजे से
मीन लग्न समाप्त – मार्च 19, 2026 को 07:43 ए एम बजे तक
चैत्र नवरात्रि 2026 चौघड़ियां मुहूर्त
शुभ – उत्तम- 06:26 ए एम से 07:57 ए एम
चर – सामान्य- 10:58 ए एम से 12:29 पी एम
लाभ – उन्नति- 12:29 पी एम से 02:00 पी एम
अमृत – सर्वोत्तम- 02:00 पी एम से 03:30 पी एम
शुभ – उत्तम- 05:01 पी एम से 06:32 पी एम
किस वाहन में सवार होकर आएंगी मां दुर्गा?
देवी भागवत पुराण के एक श्लोक में सप्ताह के वार के हिसाब से वाहन का निर्धारण किया जाता है और हर एक वाहन से आने का संकेत अलग-अलग होता है।
शशिसूर्ये गजारूढ़ा , शनिभौमे तुरंगमे ।
गुरुशुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता ।।
फलम् – गजे च जलदा देवी , छत्रभङ्ग तुरंगमे ।
नौकायां सर्व सिद्धिस्यात् दोलायां मरणं धुव्रम् ।।
इस श्लोक का अर्थ है कि अगर नवरात्रि का आरंभ रविवार या सोमवार को हो, तो माता हाथी (गज) पर आती हैं। शनि या मंगलवार को घोड़ा, गुरु या शुक्रवार को डोली और बुधवार को नाव उनका वाहन होती है।
फल-
इस श्लोक में मां के वाहन के अनुसार फल के बार में भी बताया गया है। अगर मां हाथी पर सवार हों, तो वर्षा अधिक मात्रा में होती है। अगर घोड़े पर सवार हों, तो राजसत्ता या शासन में अशांति तथा छत्रभंग का संकेत गहोता है। इसके अलावा नाव पर सवार हों, तो सभी कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है। इसके साथ ही अगर मा डोली में सवार हों, तो मृत्यु या गंभीर अनिष्ट की संभावना निश्चित मानी जाती है।
इस साल चैत्र नवरात्रि गुरुवार से आरंभ हो रही है। इसलिए वह डोली में सवार होकर आएगी। इसे मृत्यु और गंभीर अनिष्ट की संभावना है।
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के साथ-साथ उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, फिर ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है।
नोट – इस लेख में दी गई तिथियां और मुहूर्त पंचांग की गणनाओं पर आधारित हैं। स्थानीय समय और गणनाओं के अनुसार इनमें आंशिक भिन्नता हो सकती है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित या विशेषज्ञ, पंडित ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
