Lord Ganesha: इस तरह हुआ पूना के दगडू सेठ गणेश मंदिर का निर्माण

वेद गुप्ता

भक्त बुधवार को भगवान की गणेश की पूजा का सबसे उपयुक्त दिन मानते हैं आज बुधवार है। आज आपसे महाराष्ट्र के प्रमुख गणेश मंदिरों में एक पूना में स्थित दगड़ू सेठ गणेश मंदिर की चर्चा की जा रही है। इस मंदिर की स्थापना सिद्ध संत की सलाह पर एक व्यापारी ने कराई थी। बाद में इस मंदिर में जाने वाले भक्तों पर भगवान की ऐसी कृपा बरसने लगी कि यह मंदिर निर्माण कराने वाले व्यापारी दगड़ू सेठ के नाम से ही विख्यात हो गया। अब इसे दगड़ू सेठ गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है और पूना जाने वाले अधिकांश लोग इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाते हैं आप भी पूना जाएं तो इस मंदिर में जाकर पूजा अर्चना जरूर करें। आप पर भी गणेश जी की कृपा हमेशा बनी रहे यह निशंक न्यूज परिवार की भगवान गजानन से प्रार्थना है।

महराष्ट्र के लोकप्रिय मंदिरों में एक है यह मंदिर

बताया जाता है कि दगडू सेठ गणेश मन्दिर पूना का गणेशजी का यह मन्दिर महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय मन्दिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण मिठाई का काम करने वाले दगडू सेठ नाम के व्यापारी ने कराया था। दगडू सेठ गडवे एक व्यापारी और हलवाई थे जो कलकत्ता से पुना आकर बस गए थे। वे हलवाई के रूप में प्रसिद्ध थे और लोग उन्हें हलवाई के नाम से ही जानते थे। धीरे-धीरे दगडू सेठ एक समृद्ध व्यापारी और नामी हलवाई बन गए और भगवान की असीम कृपा उन पर बनी रही।

आध्यात्मिक गरू की सलाह पर बनवाया यह मंदिर

मंदिर के जानकार कहते हैं कि दगड़ू सेठ व्यापार में तल्लीन रहते थे दुर्भाग्य वश 18 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में देश में फैली प्लेग की महामारी से उनके बेटे का देहांत हो गया।अपने पुत्र की अकाल मृत्यु से दगडू सेठ टूट से गए वह गुमसुम रहने लगे। उस समय उनके आध्यात्मिक गुरु श्री माधवनाथ महाराज ने उन्हें इस दु:ख से निकलने के लिए भगवान गणेश का एक मन्दिर बनवाने का सुझाव दिया।

मनोकामना पूरी करते हैं गणपित भगवान

इसके बाद दगडू सेठ ने पुना में गणपतिजी का एक सुन्दर मन्दिर बनवाया । यह मन्दिर , दगडू सेठ गणपती मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है ; यहाँ आने वाले हर भक्त की मुराद गणेशजी पूरी करते हैं । कहते हैं , बप्पा के दर से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता है। यहाँ बप्पा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। यह मन्दिर वास्तुशास्त्र के लिहाज से बनाया गया है। मन्दिर के मुख्य मंडप की दीवारों पर आदिशक्तियों की अद्भुत झाँकी, उकेरी गई है ।शास्त्रों में बप्पा को पंचभूत कहा गया है। मान्यता है कि धरती आकाश , आग , हवा और जल की सारी शक्तियाँ इन्ही में समाहित है।

सात फुट ऊची है भगवान गणेश की प्रतिमा

इस मन्दिर में भगवान गणेश की साढे सात फ़ीट उँची और 4 फिट चौड़ी , करीब 8 कि.ग्रा. सोने की प्रतिमा स्थापित है। इस मन्दिर का निर्माण बड़ी ही खूबसूरती से किया गया है गणेश भगवान की पीठासीन प्रतिमा मन्दिर के बाहर से ही दिखाई देती है। मन्दिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दो प्रहरियों , जय और विजय की संगमरमर की सुन्दर मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। श्रीमान दगडूसेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट , दान से प्राप्त धनराशि से अनेक परोपकारी कार्य करता है और महाराष्ट्र के सबसे धनी ट्रस्टों में से एक है। यह ट्रस्ट , पुणे के कोंढवा में , पिताश्री नामक एक वृद्धाश्रम का संचालन भी करता है।आप जब भी पूना जाएँ तो एक बार दगडू गणेश मन्दिर के दर्शन अवश्य करें जी ।

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