पंडित पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
माघ मास की गुप्त नवरात्रि शक्ति उपासना का बहुत खास और रहस्यमय समय है साल 2026 में माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी आज से हो रही है यह नवरात्रि सामान्य नवरात्रों से अलग होती है, क्योंकि इसमें गुप्त साधना और आत्मिक जागरण पर अधिक ध्यान दिया जाता है। माघ गुप्त नवरात्र का विशेष संबंध दस महाविद्याओं की साधना से है गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के गूढ़ और रहस्यमय रूपों की पूजा की जाती है इसका उद्देश्य साधक को भीतर से मजबूत बनाना होता है।
माघ नवरात्र और महाविद्या परंपरा का संबंध
महाविद्या परंपरा शक्ति उपासना का एक गहरा और रहस्यपूर्ण मार्ग है माघ गुप्त नवरात्र के दौरान दस महाविद्याओं की साधना को बहुत फलदायी माना गया है यह समय शोर-शराबे और आडंबर से दूर रहकर मौन, जप और ध्यान करने का अवसर देता है महाविद्याएं केवल उग्र देवी रूप नहीं हैं, बल्कि वे मानव चेतना और आध्यात्मिक विकास के अलग-अलग चरणों का प्रतीक हैं इनकी उपासना संयम, अनुशासन और श्रद्धा के साथ की जाती है।
दस महाविद्याएं और उनका महत्व
शास्त्रों में दस महाविद्याओं का वर्णन मिलता है जिनमें मां काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल है।
मां काली- माता काली परिवर्तन और काल की देवी मानी जाती हैं।
तारा देवी– हिंदू धर्म में माता तारा को ज्ञान और करुणा का प्रतीक हैं।
त्रिपुरसुंदरी– त्रिपुरसुंदरी को सौंदर्य और संतुलन की देवी माना गया हैं।
भुवनेश्वरी– भुवनेश्वरी देवी सृष्टि और संरक्षण की शक्ति का रूप हैं।
छिन्नमस्ता– छिन्नमस्ता देवी त्याग और निर्भयता का संदेश देती हैं।
भैरवी– भैरवी देव तप, शक्ति और अनुशासन का प्रतिक मानी जाती है।
धूमावती– धूमावती देवी वैराग्य और जीवन की सच्चाई को दर्शाती हैं।
मां बगलामुखी- मां बगलामुखी को शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों को शांत करने वाली देवी माना जाता है।
मातंगी देवी– मांतगी देवी विद्या, वाणी और कला की अधिष्ठात्री हैं।
कमला देवी- कमला देवी को धन, समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक हैं।
इन दसों महाविद्याओं की साधना का उद्देश्य जीवन में संतुलन और मानसिक शांति स्थापित करना है इनकी उपासना से भय, भ्रम और अस्थिरता दूर होती है।
माघ गुप्त नवरात्र का आध्यात्मिक महत्व
माघ गुप्त नवरात्र हमें सिखाती है कि शक्ति केवल बाहरी सुरक्षा नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और आत्मबल का भी स्रोत है इन दिनों सात्विक भोजन, संयम, जप और ध्यान को विशेष महत्व दिया जाता है।
श्रद्धा और नियम के साथ की गई साधना से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में स्थिरता आती है कुल मिलाकर, माघ गुप्त नवरात्र और दस महाविद्याओं की उपासना शक्ति, ज्ञान और आत्मिक जागरण का प्रतीक मानी जाती है।
