fastः जाने इस रविवार कैसे होगा अद्भुत उर्जा का संचार

पं पवन तिवारी

संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान

मौनी अमावस्या के दिन ग्रहों के राजा सूर्य और मां-मन के दाता ग्रह चंद्रमा साथ में मकर राशि में विराजमान होंगे इससे न सिर्फ इन दोनों की युति बनेगी, बल्कि एक अद्भुत ऊर्जा का भी संचार होगा।

मौनी अमावस्या पर 18 जनवरी को रखें मौन मिलेगी पापों से मुक्ति

मौनी अमावस्या के दिन मनु ने मौन व्रत धारण करके गंगा स्नान किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन ही मनु का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन मौन व्रत धारण करके गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति को सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आत्मा की शुद्धि के लिए मौन व्रत करना शुभ फलदायी माना जाता है।

मौन रखने से बढ़ती है आत्मिक शक्ति

ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पं, पवन तिवारी।

मौन व्रत के महत्व के संबंध में ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पं, पवन तिवारी का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन अधिकतर लोग मौन व्रत रखते हैं। मौन व्रत का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि अपने मन और विचारों को भी नियंत्रित करना है। जब व्यक्ति बोलता नहीं है, तो उसकी ऊर्जा बाहर जाने के बजाय अंदर की ओर जाती है। इससे मन शांत होता है और आत्मिक शक्ति बढ़ती है। साधु-संत इस दिन मौन व्रत इसलिए रखते हैं ताकि वे गहरी साधना कर सकें। मौन रहने से मन भटकता नहीं है और ध्यान आसानी से लगता है। इससे आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध मजबूत होता है। मौन की अवस्था व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और खुद को समझने का अवसर देती है।

मानसिक शांति के लिये उपयुक्त है यह व्रत

वास्तव में मौन एक संयम है। मौनी अमावस्या का उद्देश्य बोलने से रोकना नहीं, बल्कि चेतना को एकाग्र करना है। जब हम कम बोलते हैं, तो बेकार के विचार भी कम आते हैं। इससे मन हल्का और शांत महसूस करता है। मौन व्रत के दौरान व्यक्ति अपने शब्दों के साथ-साथ अपने विचारों पर भी नियंत्रण करता है। यही कारण है कि यह व्रत मानसिक शांति के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।

अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से मिलता है मोक्ष

चंद्रमा और मन का संबंध- चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है। अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जिससे मन अस्थिर और अशांत हो सकता है। ऐसे समय में मौन व्रत रखने से मन पर नियंत्रण बना रहता है। मौन से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार कम होते हैं। जब मन शांत होता है, तभी ईश्वर का ध्यान सही ढंग से किया जा सकता है। इसलिए मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत और ध्यान को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन किया गया पुण्य कर्म व्यक्ति के जीवन के पापों को कम करता है। मौन व्रत से मन और वाणी दोनों शुद्ध होते हैं, जिससे आत्मा को शांति मिलती है। मौनी अमावस्या के दिन व्रत रखने के लिए कुछ सरल नियम बताए गए हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना होता है शुभ

ब्रह्म मुहूर्त में सुबह उठकर पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करें। स्नान के बाद मौन व्रत का संकल्प लें। देवी-देवताओं की विधिवत पूजा और ध्यान करें। पूरे दिन किसी से भी बात न करें और मोबाइल या अन्य साधनों से भी दूरी बनाए रखें। व्रत के दौरान मन में गलत या नकारात्मक विचार न आने दें। अमावस्या तिथि समाप्त होने के बाद ही मौन व्रत खोलें।

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