पंडित पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
षट्तिला एकादशी का मन 14 जनवरी बुधवार को है भगवान भास्कर मकर राशि में 14 जनवरी बुधवार को रात्रि 9:19 में आएंगे एवं इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास समाप्त हो जाएगा मकर संक्रांति का यह शास्त्रोक्त नियम है कि प्रदोष के बाद यदि रात्रि में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन होता है इस प्रकार मकर संक्रांति खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा। स्नान दान के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है सर्वत्र गंगा नदी अन्यत्र नदी तीर्थ एवं कुआं सरोवर में स्नान किया जाएगा ऊनी वस्त्र दुशाला कंबल जूता धार्मिक पुस्तक विशेष कर पंचांग का दान विशेष पूर्ण फल कारक होता है इस पर्व को पूरे देश में अपनी स्थानीय परंपरा रीति रिवाज के समय मनाया जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और उन्नति का प्रतीक है यह पर्व

भारत के प्रमुख सूर्य आधारित पर्वों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान है। यह पर्व हर वर्ष जनवरी माह में तब मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी खगोलीय परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन से सूर्य का उत्तरायण आरंभ होता है जिसे सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और उन्नति का प्रतीक माना गया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए जप तप दान और पुण्य कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यही कारण है कि प्रयागराज हरिद्वार गंगासागर जैसे तीर्थ स्थलों पर इस दिन भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अलग-अलग नाम से मनाया जाता है यह पर्व
सांस्कृतिक रूप से यह पर्व फसल कटाई से भी जुड़ा है। किसान नई फसल के आगमन पर सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग अलग नामों से मनाया जाता है जैसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति दक्षिण भारत में पोंगल असम में बिहू और पंजाब में लोहड़ी।

तिल और गुड़ का विशेष महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजनों का सेवन और दान किया जाता है। तिल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है जबकि गुड़ मिठास और सौहार्द का संदेश देता है। मान्यता है कि तिल का दान करने से पापों का नाश होता है और शरीर में ऊष्मा बनी रहती है जो शीत ऋतु में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का विशेष प्रभाव
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश ऐसे समय हो रहा है जब सामाजिक और आर्थिक स्तर पर स्थिरता और नए अवसरों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2026 में सूर्य का यह गोचर परिश्रम करने वालों को दीर्घकालीन लाभ देने वाला होगा। सरकारी सेवाओं कृषि क्षेत्र और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में सकारात्मक संकेत देखे जा रहे हैं।
शुभ लाभ के लिये किस राशि के लोग क्या करें

ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पंडित पवन तिवारी का कहना है कि इस बार संक्रांति का पर्व लगभग हर राशि के जातक के लिये शुभता लेकर आने वाला है। अगर जातक थोड़ा प्रयास करे और राशि के हिराब से दान करें तो उसे ज्यादा पुण्य फल मिल सकता है।
मेष राशि
मेष राशि वालों को इस दिन लाल वस्त्र गुड़ और तांबे के बर्तन का दान करना चाहिए। इससे ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के लिए सफेद तिल चावल और दूध का दान शुभ फल देता है। इससे आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों को हरे वस्त्र मूंग दाल या हरी सब्जियों का दान करना चाहिए। इससे बुद्धि और वाणी में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए चांदी दूध और चावल का दान विशेष फलदायी माना गया है। इससे मानसिक शांति और पारिवारिक सामंजस्य बढ़ता है।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों को गेहूं गुड़ और तांबे के पात्र का दान करना चाहिए। इससे मान सम्मान और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है।
कन्या राशि
कन्या राशि के लिए काले तिल हरी सब्जियां और पुस्तकें दान करना शुभ रहता है। इससे स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।
तुला राशि
तुला राशि वालों को सफेद वस्त्र इत्र और मिठाई का दान करना चाहिए। इससे संबंधों में मधुरता और संतुलन बना रहता है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों को लाल तिल गुड़ और कंबल का दान करना चाहिए। इससे भय और नकारात्मकता दूर होती है।
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए पीले वस्त्र चना दाल और धार्मिक पुस्तकों का दान श्रेष्ठ माना गया है। इससे ज्ञान और भाग्य में वृद्धि होती है।
मकर राशि
मकर राशि के जातकों को काले तिल लोहे की वस्तुएं और अन्न का दान करना चाहिए। इससे कर्मक्षेत्र में उन्नति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों को कंबल तिल और तेल का दान करना चाहिए। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा और मानव सेवा का अवसर मिलता है।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए पीले तिल दूध और मिठाई का दान शुभ माना गया है। इससे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक संतोष प्राप्त होता है।
किस राशि के लिये कैसी रहेगी इस बार की संक्रांति
1. मेष- उच्च पद की प्राप्ति होगी।
2. वृषभ- महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ होने के योग बनेगें।
3. मिथुन- ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।
4. कर्क- कलह-संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।
5. सिंह- किसी बड़ी उपलब्धि की प्राप्ति होगी।
6. कन्या- शुभ समाचार मिलेगा।
7. तुला- व्यवसाय में बाहरी संबंधों से लाभ तथा शत्रु अनुकूल होंगे।
8. वृश्चिक- विदेशी कार्यों से लाभ तथा विदेश यात्रा होगी।
9. धनु- चहुंओर विजय होगी।
10. मकर- अधिकार प्राप्ति होगी।
11. कुंभ- विरोधी परास्त होंगे। भेंट मिलेगी।
12. मीन- सम्मान, यश बढ़ेगा।
स्नान-दान पूजा का हजार गुना मिलता है पुण्य

मकर संक्रांति में ‘मकर’ शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि ‘संक्रांति’ का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति का महत्व इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भूलाकर उनके घर गए थे। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है।
पतंग महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है यह पर्व
यह पर्व ‘पतंग महोत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग पतंग उड़ाते हैं। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताने की मुख्य वजह बताई जाती है। सर्दी के इस मौसम में सूर्य का प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा और हड्डियों के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है।
हर तरह से मिलता है पुण्य लाभ
सूर्य संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। संत-महर्षियों के अनुसार इसके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है। संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञान तंतु विकसित होते हैं। मकर संक्रांति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह संपूर्ण भारत वर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है।
यह छह काम करें तो और बेहतर रहेगा
विष्णु धर्मसूत्र में कहा गया है कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए एवं स्व स्वास्थ्यवर्द्धन तथा सर्वकल्याण के लिए तिल के छः प्रयोग पुण्यदायक एवं फलदायक होते हैं- तिल जल से स्नान करना, तिल दान करना, तिल से बना भोजन, जल में तिल अर्पण, तिल से आहुति, तिल का उबटन लगाना।
सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से देवों की ब्रह्म मुहूर्त उपासना का पुण्यकाल प्रारंभ हो जाता है। इस काल को ही परा-अपरा विद्या की प्राप्ति का काल कहा जाता है। इसे साधना का सिद्धिकाल भी कहा गया है। इस काल में देव प्रतिष्ठा, गृह निर्माण, यज्ञ कर्म आदि पुनीत कर्म किए जाते हैं। मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व से ही व्रत उपवास में रहकर योग्य पात्रों को दान देना चाहिए।
समाज में सकारात्मकता लाएगी इस बार मकर संक्रांति
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह पर्व हमें परिश्रम अनुशासन और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इस दिन किया गया दान न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुख समृद्धि लाता है बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। सूर्य देव की कृपा से नया उत्तरायण सभी के जीवन में उजाला लेकर आए यही कामना है।
