Achievementः सर्जरी के क्षेत्र में जीएसवीएम ने गाड़ा झंडा

अमित गुप्ता

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों ने साल के जाते-जाते एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। चिकित्सकों के प्रयास से जीएसवीएम कानपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार अत्याधुनिक बेरिएट्रिक एवं मेटाबॉलिक सर्जरी – स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी विद सिंगल एनास्टोमोसिस डुओडेनो-जेजुनल बाइपास (एसएडीजे-बी) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

पहली बार हुई अत्याधुनिक बेरिएट्रिक एवं मेटाबॉलिक सर्जरी

जानकारों की मानी जाए तो महिला मरीज काफी से समय से विभिन्न बीमारियों से परेशान थी। मरीज का 100 किलो का वजन के कारण उसको एंटीरियर एब्डॉमिनल वॉल हर्निया भी हो गया था। साथ ही वे पिछले 10 वर्षों से हाईपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज तथा ऑस्टियोआर्थराइटिस से ग्रसित थीं और नियमित उपचार पर थीं। इस तरह का उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में पहली बेरिएट्रिक एवं मेटाबॉलिक सर्जरी है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

हाईपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज़ तथा ऑस्टियोआर्थराइटिस से ग्रसित थी मरीज

सर्जरी के संबंध में जानकारी देते जीएसवीएम के प्राचार्य संजय काला साथ में टीम में शामिल रहे डाक्टर।

कालेज के डीन एवं प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला ने बताया कि कर्रही, कानपुर नगर निवसनी एक 54 वर्षीय महिला मरीज अत्यधिक मोटापे के कारण दैनिक गतिविधियाँ करने में असमर्थ थीं और चलने-फिरने के लिए पूरी तरह व्हीलचेयर पर निर्भर थीं। अत्यधिक वजन होने के कारण मरीज को एंटीरियर एब्डॉमिनल वॉल हर्निया भी हो गया था। साथ ही वे पिछले 10 वर्षों से हाईपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज़ तथा ऑस्टियोआर्थराइटिस से ग्रसित थीं और नियमित उसका इलाज चल रहा था। शुरूआत में मरीज को वजन घटाने हेतु डाइटरी मॉडिफिकेशन एवं जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी गई, लेकिन सही परिणाम न मिलने पर विस्तृत जांच के बाद उन्हें बेरिएट्रिक एवं मेटाबॉलिक सर्जरी के लिए चयनित किया गया। यह जटिल ऑपरेशन 10 दिसम्बर 2025 को सफलतापूर्वक किया गया जोकि लगभग 6 घंटे तक चला। डॉ काला ने बताया 6 महीने में मरीज का वजन आधा हो जाएगा ,प्राइवेट हॉस्पिटल में 15 लाख का लगभग खर्च लगता जिसे कानपुर मेडिकल कॉलेज में नि शुल्क किया गया।इस सर्जरी को अनुभवी चिकित्सको की टीम द्वारा अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। सर्जरी के बाद मरीज को पूर्व से चली आ रही लम्बी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए 7 दिनों तक आईसीयू में विशेष निगरानी में रखा गया।

सर्जिकल टीम में शामिल चिकित्सक

डॉ. संजय काला (प्रिंसिपल एवं डीन), डॉ. आर. के. जौहरी (प्रोफेसर), डॉ. अभिषेक गोंड (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. आलोक यादव (जेआर-3), डॉ. सुमित सिंह (जेआर-3), डॉ. सुरेश (जेआर-3), डॉ. दिशा गुलाटी एवं डॉ. काफिलुर रहमान रहें। तो वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. पल्लवी एवं डॉ. करण के साथ पैरा मेडिकल स्टॉफ मौजूद रहा।

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