जीका वायरसः कानपुर में 72 टीमें ने 4 KM के दायरे में 55-60 हजार घरों में ढूंढा लार्वा

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वेद गुप्ता

निशंक न्यूज/कानपुर। कानपुर में एक एयरफोर्स कर्मी में जीका वायरस संक्रमण पाए जाने के बाद से प्रशासन सतर्क मोड पर आ गया है। बुधवार को दिल्ली और लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की 72 टीमें संक्रमण की जांच कर रही हैं। करीब 4 किलोमीटर के दायरे में हो रही जांच में 55 से 60 हजार घर हैं, जहां लार्वा मिल रहा है।

उधर, संक्रमित शख्स के परिवार वालों और करीबियों के नमूनों की जांच निगेटिव आई है। दिल्ली और लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने एक बार फिर से पीड़ित के घर पोखरपुर और आसपास बने मकानों का जायजा लिया है। साथ ही वहां से मच्छरों को भी जांच के लिए पकड़ा।

यहां मिला लार्वा

हालांकि, आसपास के घरों से लिए गए सैंपलों में कुछ जगह लार्वा भी मिले हैं। सबसे ज्यादा लार्वा पीड़ित के घर के सामने बनी मस्जिद में पाया गया। मस्जिद में हाथ-पैर धोने के लिए बनी टंकी में लार्वा पनप रहा है। इसके अलावा उससे जुड़े घरों में भी लार्वा पाया गया। दिल्ली से आई टीम ने मस्जिद के अंदर जाकर वहां के मौलवी से बात की। उन्होंने विदेश और दूसरे राज्यों से आने वालों का डिटेल मांगा। स्वास्थ्य विभाग ने वहां एंटी लार्वा का छिड़काव भी किया।

दिल्ली से आई टीम जीका वायरस पीड़ित के घर पहुंची। उसने परिजनों से पूछा कि वह किस कमरे में ज्यादा वक्त गुजारते थे और कहां-कहां आना जाना था। इसके साथ ही CMO डॉ. नेपाल सिंह भी लखनऊ की टीम के साथ वहां पहुंचे। पीड़ित परिवार के परिजनों ने दिल्ली की टीम को बताया कि शहर की लोकल स्वास्थ्य टीम दिन में दो बार फॉगिंग करती है। इससे उनको काफी तकलीफ होने लगी है।

उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम के डॉ. अशोक ने जीका वायरस के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जिन मच्छरों के काटने से जीका वायरस फैलता है, वह तड़के और सूरज ढलने के समय निकलते हैं। इसलिए सुबह-शाम फॉगिंग करने से कुछ नहीं होगा।

CMO डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि हम लोगों ने 72 टीमें सघन जांच में लगा रखी हैं। जो क्षेत्र में सफाई, एंटी लार्वा का छिड़काव, लार्वा नष्ट करने, बुखार रोगियों की पहचान, गंभीर मरीजों की स्क्रीनिंग, हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच कर रही हैं। वहीं, पिछले दिनों में 4-5 किलोमीटर के रेडियस में जिन लोगों को बंदर ने काटा है, उनकी मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही सैंपल लेकर पुणे भेजे जाएंगे।

दिल्ली से आए सीनियर वैज्ञानिक और डॉक्टर भी इन सवालों के जवाब ढूंढ़ने में लगे हैं। लेकिन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे सके हैं। स्वास्थ्य विभाग और महामारी विभाग के अधिकारी इन्हीं सवालों पर मंथन कर रहे हैं।

उनका सोचना है कि बिना ट्रेवल हिस्ट्री के जीका वायरस कैसे हुआ?

वायरस का सोर्स क्या है?

यह किसी बाहरी व्यक्ति के जरिए हुआ है या कहीं बंदर के काटने से तो नहीं हुआ?

यह कोई डेंगू या जीका वायरस का नया म्यूटेट तो नहीं है?

पीड़ित के घर के पास फॉगिंग करती टीम।

पीड़ित के घर के पास फॉगिंग करती टीम।

100 तरह के वायरस लाते हैं फीवर

पिछले एक महीने में शहर और कुछ ग्रामीण इलाकों में बुखार से 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई हैं। सभी मरीजों में डेंगू के लक्षण तो थे, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं थी। इनके इलाज में लगे डॉक्टरों ने सभी का इलाज लक्षण देखते हुए अंदाजे से किया था।

शहर में अच्छी लैब न होने के कारण डॉक्टरों का कहना था कि यह पता लगा पाना मुश्किल है कि कौन सा वायरस सक्रिय हुआ है। लगभग 100 तरह के वायरस फीवर के लिए जिम्मेदार हैं, जो म्यूटेट कर बार-बार लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। इसलिए आशंका है कि कहीं डेंगू वायरस तो म्यूटेट नहीं हुआ है।