दलीय पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए खतरा : प्रमोद गोस्वामी

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ओ. पी. पाण्डेय

निशंक न्यूज/आगरा। पीटीआई के पूर्व चेयरमैन प्रमोद गोस्वामी ने दलीय पत्रकारिता को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि आज से 30 वर्ष पूर्व खोजी पत्रकारिता होती थी, लेकिन उत्तरप्रदेश में जब  मुलायम सिंह  यादव मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने दवाव व प्रभाव का स्तेमाल कर दलीय पत्रकारिता की नींव डाल दी, आज भी दलीय पत्रकारिता के कारण लोकतंत्र को क्षति पहुंच रही है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने में पत्रकारिता व न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है अगर निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं होगी तो पीड़ितों को न्याय व दोषियों को सजा मिलना मुश्किल हो जाएगा यह उदगार प्रमोद

 गोस्वामी ने होटल मुगल शेरेटन में सामाजिक प्रतिनिधियों को मीडिया के महत्व के विषय में जानकारी देते हुए व्यक्त किए ।

उन्होंने बताया कि पत्रकारिता सरकार और जनता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होती है।लेकिन  आज लोकतंत्र के चौथे मजबूत स्तम्भ की साख दांव पर है। आज भरोसा खत्म होता जा रहा है,जिसका कारण पत्रकारिता का व्यबसायीकरण अर्थात बाजारीकरण हो गया है।इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार इंटरनेट,शोसल मीडिया है।क्योंकि इनके कारण हर समाचार तेजी से फैल जाता है।साथ ही मिर्च मसाला लगाना भी आसान है।कुल मिलाकर डिजिटल युग के कारण सच्ची व खोजी पत्रकारिता में गिरावट आती जा रही है। वंही राजनीति व पूंजीवाद से मीडिया की आजादी पर भी खतरा मंडरा रहा है।जिससे किसी का भी महिमा मंडन और किसी को भी चोर ठहराना शुरू होगया है। जिससे कोर्ट के निर्णय से पूर्व ही मीडिया फैसला सुना देती है। जिससे ईमानदार पत्रकारों को समझौतों के लिए विवश होना पड़ता है। कुछ पत्रकारों की बजह से मीडिया जगत पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

इस दौरान भाजपा नेता के के भारद्वाज, अमित गोस्वामी, राजेश वर्मा,बंटी शुक्ला, बृजेश पाराशर,सुधांशु खंडेलवाल,प्रदीप राठौर,सुनील बघेल,चंद्रप्रकाश प्रजापति आदि सहित कई पत्रकार बन्धु मौजूद रहे।