वेद गुप्ता
आज मंगलवार है और मंगलवार का दिन राम भक्त हनुमान की पूजा के लिये सबसे शुभ दिन माना जाता है। आज की कथा में हनुमान जी के अस्त्र-शस्त्र के बारे में बात की जा रही है। वैसे तो रामभक्त महाबली श्री हनुमान जी के अस्त्र-शस्त्रों में आम लोग गदा को ही जानते हैं यह उनका पहला अस्त्र है उनके अस्त्रों में पहला स्थान उनकी गदा का है लेकिन कथाएं बताती हैं कि केवल गदा के साथ दिखने वाले महाबली हनुमान दस अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाले हैं । हनुमान जी अपने प्रभु श्रीराम के चरणों में पूर्ण समर्पित आप्तकाम निष्काम सेवक है।
हनुमान जी को यम और कुबेर से भी मिला था वर

उनका सर्वस्व प्रभु की सेवा का उपकरण है उनके संपूर्ण अंग-प्रत्यंग, रद, मुष्ठि, नख, पूंछ, गदा एवं गिरि, पादप आदि प्रभु के अमंगलों का नाश करने के लिए एक दिव्यास्त्र के समान है । हनुमान जी वज्रांग हैं । यम ने उन्हें अपने दंड से अभयदान दिया है, कुबेर ने गदाघात से अप्रभावित होने का वर दिया है , भगवान शंकर ने हनुमान जी को शूल एवं पाशुपत आदि अस्त्रों से अभय होने का वरदान दिया था , अस्त्र-शस्त्र के कर्ता विश्वकर्मा ने हनुमान जी को समस्त आयुधों से अवध्य होने का वरदान दिया है ।
ये दस हैं हनुमान जी के अस्त्र-शस्त्र
शास्त्रों में हनुमान जी को दस आयुधों से अलंकृत कहा गया है । हनुमान जी के अस्त्र शस्त्र की व्याख्या में खड्ग, त्रिशूल, खट्वांग, पाश, पर्वत, अंकुश, स्तम्भ, मुष्टि, गदा और वृक्ष हैं । हनुमान जी का बायां हाथ गदा से युक्त कहा गया है
एक कथा के अनुसार श्री लक्ष्मण और रावण के बीच युद्ध में हनुमान जी ने रावण के साथ युद्ध में गदा का प्रयोग किया था उन्होंने गदा के प्रहार से ही रावण के रथ को खंडित किया था । स्कंदपुराण में हनुमान जी को वज्रायुध धारण करने वाला कहकर उनको नमस्कार किया गया है उनके हाथ में वज्र सदा विराजमान रहता है । अशोक वाटिका में हनुमान जी ने राक्षसों के संहार के लिए वृक्ष की डाली का उपयोग किया था , हनुमान जी का एक अस्त्र उनकी पूंछ भी है , अपनी मुष्टिप्रहार से उन्होंने कई दुष्टों का संहार किया है ।
