‘‘को-विन‘‘ एप और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल का आभाव

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वेद गुप्ता

निशंक न्यूज/कानपुर । कोविड वैक्सीन प्रोग्राम के तहत केन्द्रीय स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित ‘‘को-विन‘‘ एप और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल का आभाव नजर आने लगा है। व्यवस्था ये की गयी  है कि कोविड से बचाव की वैक्सीन लगवाने के इच्छुक व्यक्ति को ‘‘कोविन डाॅट जीओवी डाॅट इन पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। आधार नम्बर और मोबाईल नम्बर की जानकारी दर्ज करने के बाद कम्पयूटर स्क्रीन पर इच्छुक व्यक्ति को अपनी पसन्द के वैक्सीनेशन शेड्यूल और स्थान को चुनने का विकल्प हासिल होता है।

स्थान के कालम में कानपुर नगर का चयन करने के बाद दो आप्शन सामने आते हैं जिसमें पेड और निःशुुल्क वैक्सीनेशन सेण्टर के नाम सामने आते हैं। यही नहीं, सुबह नौ बजे से शाम पाॅच बजे के बीच में से कोई सुविधा जनक समय चयन करने का विकल्प भी मिलता है।

बस यहीं पर केन्द्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल का आभाव देखने को मिला है। उदाहरण के तौर पर एक केस की बानगी यहाॅ प्रस्तुत की जा रही है। हर्ष नगर की निवासी सीमा अग्रवाल ने एक सप्ताह पूर्व वैक्सीन के लिये अपना आनलाईन रजिस्ट्रेशन कराया। उन्होने दिये गये विकल्पों में ग्वालटोली स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को चुना। उन्हें वैक्सीनेशन के लिये 31 मार्च की तारीख और अपरान्ह तीन से पाॅच बजे का समय मिला। सीमा निर्धारित दिन यानि आज 31 मार्च को जब ग्वालटोली स्थित वैक्सीनेशन सेण्टर पर पहुॅची तो वहाॅ मौजूद स्वास्थ्यकर्मी ने उन्हें बताया कि इस सेण्टर पर सप्ताह में केवल दो दिवसों गुरूवार और शुक्रवार को वैक्सीन की आपूर्ति होती है। उन्होने जब आनलाईन एप्वाइण्टमेण्ट लेटर की प्रति दिखायी तो उनसे कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय के एप ने उन्हें किस आधार पर आज की तारीख दी है, इसपर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं लेकिन उन्होंने सलाह दी कि वो अपना वैक्सीनेशन डे गुरूवार के लिये रि-शेड्यूल करा लें।

सवाल ये उठता है कि वैक्सीनेशन सेण्टर से बैरंग लौटने वाली केवल ये एक अकेली महिला नहीं रही होंगी। अमूमन ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन में हर सेण्टर पर एक दिन में 120 लोगों को वैक्सीन लगने का एप्वाईण्टमेण्ट दिया जाता है। इस तरह अनेक लोग निराश होकर वापस लौटे होंगें और अगर ये हाल अन्य सेण्टरों का भी है तो इनकी संख्या हजारों में होगी।

सवाल ये भी उठता है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित ऑन  लाइन रजिस्ट्रेशन  सिस्टम ‘‘को-विन‘‘ और राज्य सरकार द्वारा संचालित वैक्सीनेशन सेण्टरों के बीच तालमेल क्यों नहीं बैठ पा रहा  है। क्या निराश होकर लौटने वाले कई लोग ऐसे नहीं होगें जो दोबारा वैक्सीनेशन सेण्टर का रूख न करें और सरकार  के ‘‘विनिंग ओवर कोविड’’ प्रोग्राम को धक्का लगे। साथ उक्त एप्वाइण्टमेण्ट लेटर, को-विन का स्क्रीन शाॅट तथा कानगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की तस्वीर भी प्रस्तुत है।

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