फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षक होंगे बर्खास्त

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38.30 करोड़ रुपये वसूली की तैयार हुई फाइल

निशंक न्यूज

गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों को बर्खास्त करने के बाद उनसे रिकवरी की कार्रवाई तेज कर दी है। जिले में अब तक बर्खास्त 76 शिक्षकों में से 74 की सूची बेसिक शिक्षा विभाग ने उनके गृह जनपद के जिला प्रशासन को भेज दी है, जिनसे कुल 38.30 करोड़ रुपये करोड़ की रिकवरी की जाएगी। जिन शिक्षकों की सूची जिला प्रशासन को भेजी गई है, उनमें से सर्वाधिक रिकवरी जिले के गोला विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय ककरही की बर्खास्त शिक्षिका साधना देवी से होनी है।

पहले चरण में 25 शिक्षकों से 76 लाख रुपये की रिकवरी का ब्योरा तैयार कर राजस्व विभाग के पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही संबंधित जनपद के जिला प्रशासन को भेजा गया था। दूसरे चरण में 49 और फर्जी शिक्षकों के वेतन रिकवरी का ब्योरा तैयार कर फाइल बर्खास्त शिक्षकों के गृह जनपद के संबंधित जिला प्रशासन को भेज दी गई है।

जनपद में बर्खास्त हुए 76 शिक्षकों में से वेतन की रिकवरी सिर्फ 74 शिक्षकों से ही होगी। दो शिक्षकों का वेतन न मिलने से उनकी रिकवरी शून्य है।

इन बर्खास्त शिक्षकों से होनी है सर्वाधिक रिकवरी

सुधा देवी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, ककरही 84,12,958

सुरेश कुमार, प्राथमिक विद्यालय, महुआपार 82,33,249

शिव बचन सिंह, प्राथमिक विद्यालय, नौंवापार 82,82,063

जनपद में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी के मामले में बर्खास्त फर्जी शिक्षकों से वेतन रिकवरी की फाइल तैयार कर संबंधित शिक्षकों के गृह जनपद के जिला प्रशासन को भेजने के साथ ही राजस्व विभाग के पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। 74 शिक्षकों से वेतन के मद में 38.30 करोड़ रुपये की धनराशि की रिकवरी की जानी है। – बीएन सिंह, बीएसए।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड प्रयागराज द्वारा मनमाने ढंग से कला विषय के टीजीटी, पीजीटी की भर्ती जारी की गई है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है। 2020 के जारी विज्ञप्ति में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा 1921 में जारी नियमावली लगभग सौ वर्ष पुरानी हो चुकी है। इस आधार पर कला विषय में योग्यता को मान्यता दी गई है। जबकि वर्तमान समय में कला के क्षेत्र में यथोचित डिग्री स्नातक बीए व बीबीए के स्थान पर इंटरमीडिएट के केवल एक वर्षीय प्राविधिक कला को मान्यता दी जा रही है, जो न्याय संगत नहीं है। यह बातें विवि के छात्र शेखर त्रिपाठी, अजय कुमार, चंदन सिंह, सुरेंद्र प्रजापति, सुनील कुमार, राम उजागिर ने बुधवार को संयुक्त प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि कला के छात्रों की मांग यही है कि कला विषय से टीजीटी-पीजीटी के लिए कला से ही स्नातक और परास्नातक को अनिवार्य किया जाए।