कई बीमारियों का कारण बनते मिलावटी खाद्य पदार्थ

ओ० पी० पाण्डेय

अलीगढ। खाद्य एवं पेय पदार्थों में की जा रही मिलावट मानव शरीर में अनेकानेक प्रकार की घातक बीमारियों की जनक तो है ही, साथ ही कभी-कभी यह मिलावट सामूहिक मृत्यु का कारण भी बन जाती है। यह मिलावट खाद्य एवं पेय पदार्थों को विषैला और प्राणघातक बना रही है। मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से अक्सर व्यक्ति हृदय, लीवर, किडनी और आंखों की घातक बीमारियों का शिकार हो जाता है। इस मिलावट को सीधे-सादे शब्दों में इसे धीमा ज़हर कहा जा सकता है। इस मिलालट का रोकने के लिये अलीगढ़ प्रशासन ने अभियान शुरू किया है। जिले के सहायक खाद्य आयुक्त का कहना है कि लोगों की जान व स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिये मिलावट खोरी के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा जो लगातार चलता रहेगा।

त्योहारों पर शुद्ध सामग्री उपलब्ध कराना होगी प्राथमिकतासहायक खाद्य आयुक्त

कार्यालय में काम करते अलीगढ़ के सहायक खाद्य आयुक्त दीनानाथ यादव

आम दिनों में मिलावट का दो ऱेव सामान्य गति से चलता है वह त्यौहारों के समय और शादी-ब्याह के काल में चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ जाता है। इसकी जानकारी के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त द्वितीय दीनानाथ यादव का कहना है कि उनका प्रयास होगा कि आगामी श्री कृष्ण जन्माष्टमी के साथ ही आने वाले अन्य त्योहारों पर उनका यही प्रयास होगा कि जनपद वासियों को सुरक्षित एव गुणवत्तापूर्ण खाद्य एवं पेय पदार्थो की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके ; विशेषकर दुग्ध उत्पादन और उससे संबद्ध खोवा, पनीर, दूध, दही, मिठाई आदि पर पैनी नजर रहेगी।

15 माह में वसूला गया 50 लाख का जुर्माना

श्री यादव द्वारा मिलावट खोरों के खिलाफ चलाए गए अभियान का ही असर है कि पिछले करीब एक महीने में जनपद अलीगढ़ में मिलापट खोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई और विभाग मिलाटखोरों से लगभग 50 लाख रुपए से अधिक जुर्माने के तौर पर वसूले जा चुके हैं जो स्वयं में एक कीर्तिमान है।उनकी दृष्टि में मिलावट एक अक्षम्य गंभीर सामाजिक अपराध है जिसके उन्मूलन हेतु न केवल दंडात्मक कार्यवाही बल्कि समाज द्वारा भी एक ईमानदार प्रहारक पहल जरूरी है।

कई गुटखा में होता गैंबियर का इस्तेमाल

मिलावट के विरुद्ध समाज को जागरूक करने की दृष्टि से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त द्वितीय अलीगढ़ दीनानाथ यादव ने बताया कि मिलावटी वस्तुओं का सेवन करने से हमारा शरीर तुरंत प्रभावित नहीं होता अपितु यह हमारे शरीर में पहुंच कर धीमे ज़हर के रूप में क्रियाशील हो जाता है जिसके घातक परिणाम कालांतर में परिलक्षित होते हैं भयावह बीमारियों के रूप में।मिलावट रूपी दीमक धीरे-धीरे मानव शरीर को निगल जाती है। देश में बढ़ते पान-मसाला के उपयोग पर दीनानाथ यादव की यह चिंता भी अनुचित नहीं है कि कैंसर का कारक बन रहा है पान मसाला। पान-मसाले के जांच हेतु लिए गए सैंपल में घातक कैमीकल गैम्बियर की उपस्थिति कैंसर का प्रमुख कारण है। गैम्बियर कैमीकल के संदर्भ में यह समझ लेना आवश्यक है कि इसका अधिकांश उपयोग मूलतः कानपुर जनपद में चमड़े को रंगने में किया जाता है। कत्था के स्थान पर इसी घातक का प्रयोग पान मसाला में किया जाता है।हां, कई प्रतिष्ठित ब्रांड इस कैमीकल से अवश्य दूरी बनाकर रखते हैं।

चौकोर होती है हानिकारक खेसारी दाल

दीनानाथ यादव ने खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट और उसके दुष्परिणामों से संबंधित हुई इस सार्थक बातचीत में यथार्थ को रेखांकित करते हुए जिन तथ्यों को उजागर किया वह विचारणीय हैं। अरहर की दाल के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें मिलावटखोर खेसारी दाल का उपयोग करते हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद हानिकारक है। इसके उपयोग से हमारा पाचनतंत्र क्षतिग्रस्त हो जाता है, परिणामत: इंसान का निचला शरीर लकवाग्रस्त होकर बेजान बन जाता है।इस मिलावट को थोड़ी सावधानी और गहनता से निरीक्षण कर पहचाना जा सकता है। अरहर की दाल गोल होती है और एक ओर से फूली हुई होती है जबकि खेसारी दाल चौकोर होती है। दूध एवं दुग्ध उत्पादन हमारे दैनिक जीवन से जुड़े हुए हैं जिनका उपयोग हर रोज लगभग हर परिवार में किया जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है मगर इन उत्पादों में की जा रही घातक मिलावट स्वास्थ्य को सर्वाधिक हानि पहुंचाने में सक्षम सिद्ध हो रही है।

कृतिम खोवा से लीवर-किडनी पर पड़ता असर

त्यौहारों के समय अधिकतर उपयोग में आने वाले पनीर के साथ ही खोवा भी एक ऐसा दुग्ध उत्पाद है जिसका उपयोग मिठाइयों में किया जाता है और इस समय इसकी खपत अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाती है। इस मिलावटी व कृत्रिम खोवे से लीवर और किडनी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। मिलावटी व कृत्रिम खोया मिठाइयों में घातकता का संचार करता है तो मिठाइयों में प्रयुक्त रंग भी हमारी शारीरिक क्षमता को प्रभावित करता ही है। इन रंगों से निर्मित मिठाई से दूरी बनाकर ही हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। यह रंग किसी न किसी रूप में हमें हानि ही पहुंचाते हैं।

एलम्यूनियम के वर्क से होती लकवा की बीमारी

एलम्यूनियम का वर्क शरीर के लिये नुकसान दायक होता है। यह वर्क हमारे शरीर में प्रविष्ट हो कर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। भूलने की बीमारी और लकवा मार जाने जैसी इसके प्रयोग से संभंव हैं। श्री यादव का कहना है कि इसी प्रकार उन मिठाइयों से भी हमें बचना चाहिए जिन पर चांदी जैसे वर्क लगे हों। चांदी के वर्क की कीमत अधिक होने के कारण कुछ मिलावटखोर विक्रेता उसके स्थान पर एलम्यूनियम के वर्क प्रयोग में लाते हैं । यह वर्क हमारे शरीर में प्रविष्ट हो कर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। भूलने की बीमारी और लकवा मार जाने जैसी बीमारियां एलम्यूनियम वर्क के खाने से होती हैं। बाजार में बिकने वाले दही में कुछ मिलावटखोर दही का वजन बढ़ाने के लिए मैदा का भी प्रयोग करते हैं जबकि इस दही का उपयोग हम व्रत उपवास में भी करते हैं। यद्यपि जनपद वासियों को यह विश्वास दिलाते हैं कि जिस तरीके से पावन पर्व रक्षाबंधन त्यौहार पर मिलावट खोरी पर लगाम लगाई गई थी ठीक उसी प्रकार पावन पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी के त्यौहार पर किसी कीमत पर मिलावटखोरी नहीं होने दी जाएगी तथा मिलावटखोरी के विरुद्ध प्रभावी परिवर्तन कार्यवाही संपादित की जाएगी ।

शुद्ध एव सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही खरीदें

मानव जीवन के लिए बेहद उपयोगी इस सार्थक जानकारी के माध्यम से दीनानाथ यादव जी ने समाज के लिए स्पष्ट संदेश दिया है कि बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के आकर्षण व आवरणों पर न जाकर शुद्ध एवम सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही खरीदें। उन्होंने साफ शब्दों में अपने संकल्प को पुनः दोहराया कि इस पावन त्यौहार श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर वह स्वास्थ्य के लिए अति घातक मिलावटखोरी करने वालों के मंसूबों को कभी भी पूरा नहीं होने देंगे। अपने स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए बाजार में बिकने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों से बचकर रहना चाहिए और घर पर बने खाद्य एवं पेय पदार्थों का सेवन करना ही स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा हितकर है। कम खाएं मगर शुद्ध खाएं, वही उपयोगी और बहुमूल्य है।

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