कोरोना संकटकाल में मध्यमवर्ग बर्बादी की कगार पर, उठा सकता है आत्मघाती कदम

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ओ पी पाण्डेय निशंक न्यूज़


अलीगढ़: कोविड 19 के संकटकाल मे अधिकतम देश वासियों का जीवन छिन्न-भिन्न कर दिया है समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए है । जिसमें सबसे अधिक समाज का मध्यम वर्ग प्रभावित हुआ है ।क्योंकि मध्यमवर्ग शर्म के कारण अपनी पीड़ा किसी से भी व्यक्त नहीं कर सकता।मध्यम वर्ग की पीड़ा तो जीवन के प्रारम्भकाल से थी जो अब मृत्यु लोक की ओर जाने तक रहती है। किंतु इस कोरोनावायरस काल में समाज का मध्यमवर्ग पूरी तरह से टूट गया है वह अपनी पीड़ा ना तो किसी को बता सकता है और ना ही संकोच के कारण मध्यमवर्ग किसी से भी सहायता नहीं ले सकता है क्योंकि सदैव उसका स्वाभिमान आड़े आता है स्वाभिमान बनाए रखने के लिए वह अपनी पीड़ा को दिल में दबाए हुए मृत्युलोक की ओर अक्सर हो जाता है। संकटकाल में विफल होने पर ज्यादातर मध्यम वर्ग के लोग ही आत्महत्या जैसे आत्मघाती निर्णय अधिक लेते हैं। यू तो देश मे 10 से 20 हजार तक महीना कमाने वाले मध्यम वर्ग के लोग बाहुल्य संख्याओ में है ।जो अपनी इन्ही छोटी धनराशि से अपने परिवार की दवा, राशन, किताब, स्कूल शुल्क व अन्य पर खर्च किया करते है। जिससे उनका जीवन प्रतिमाह नये संकटो से घिर जाते है। कुछ लोग तो ऐसे भी होते है जो किसी से मांगने व सहायता लेने में संकोच करते है। देश के लॉकडाउन ने सभी की जीवन धारा में खलबली सी मचा दी है। जिससे उनका बहुत कुछ शून्य पड़ चुका है।कोरोना महामारी के इस दौर में लॉकडाउन के होते हुए भी ऐसे महावीर दानवीर और समाजसेवी सामने आकर निरन्तर गरीबो की सेवा में तन मन धन से लगे है उनका तो मानो जैसे एक ही उद्देश्य हो कि कोई भी भूखा न सोये और वे अपने इस सराहनीय कार्य मे कुछ हद तक सफल भी हो रहे है।परन्तु मध्यम श्रेणी कुटुंब वालो पर भी सहयोग करने की आवश्यकता है।जिन्हें गुपचुप योजना अनुसार ही राशन व अन्य सामग्री दिया जा सकता है ।क्योकि ऐसे लोग न तो अपनी पीड़ा किसी को बता पाते है और ना ही बॅटने वाले सामग्री की कतारों में खड़े ही नजर आते है। जिससे यह परम आवश्यक हो जाता है कि जनहित मे ऐसे संकुचित व स्वाभिमान व्यक्तियों के परिवारों तक राहत सामग्री पहुचाने का निर्णय लिया जाए। मेरा सुझाव तो यही है कि ऐसे स्वाभिमानी कष्टदायको को जैसे भाई, बहन, मित्र, सम्बन्धी, रिश्तेदार तथा पड़ोसी, जो आपके निकट हो , पड़ताल कर खामोशी से सहयोग करने की प्रतिज्ञा ले। जिससे उनके स्वाभिमान को बचाते हुए उनके जीवन के दुख के पर्वत को नष्ट कर पुनः प्रकाश शक्ति व उत्साह का संगम भर सके। यदि इस परियोजना में तनिक भी विलम्ब किया गया तो आनेवाले कल में समाज के मध्यम वर्ग मे आत्महत्या के कारण मरने वालों की संख्या अधिक हो जाएगी। अंततः शासन- प्रशासन के साथ-साथ सभी समाजसेवियो से विशेष आग्रह है कि आप ईश्वर या ख़ुदा का नाम ले कर ऐसे पुण्यकारी कार्य मे वचनबद्ध होकर शामिल होकर ऐसी व्यवस्था करे कि जनहित योजना के क्रम यदि मध्यम वर्ग के कुछ लोग प्रत्यक्ष रूप से सहायता लेने हेतु सकुचाये तो आप उनके विश्वसनीय लोगो के माध्यम से गुप्तरूप से सहायता करे। जिससे वे लज्जित न होते हुए सहायता पूर्ण रूप से ले सके ।यदि हम सभी ऐसे कार्यो में सफल हो सके तो हमारा जीवन भी सार्थक हो सकेगा।इस कोरोना संकटकाल मे हमारे समाज का मध्यम वर्ग बर्बाद होने से बच सके।