प्रमुख मोहन भागवत ने चित्रकूट में स्वयंसेवकों को सेवाभाव की दी सीख

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निशंक न्यूज

चित्रकूट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत नौ जुलाई से शुरू हो रही बैठक में शामिल होने के लिए तीन दिन पहले ही मंगलवार को चित्रकूट पहुंच गए। सुबह छह बजे ट्रेन से उतर कर वह सीधे आरोग्यधाम में संघ की शाखा में गए। वहां ध्वज प्रणाम के साथ प्रार्थना की। स्वयंसेवकों को सराहा और सेवाभाव की सीख दी। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी की। अब वह सात दिवसीय प्रवास के दौरान पहले तीन दिन स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद मुख्य बैठक में शामिल होंगे।

चित्रकूट जिले की सीमा से सटे मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआइ) के आरोग्यधाम में नौ से 12 जुलाई तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की बैठक है। अखिल भारतीय संघ टोली पदाधिकारी व क्षेत्र प्रचारक एक साथ बैठेंगे, जबकि प्रांत प्रचारक वर्चुअल जुड़ कर अपने कार्यों का आकलन करेंगे। साथ ही आगामी कार्ययोजना को मूर्तरूप देंगे। संघ की मुख्य बैठक चार दिन होनी है।

सूत्र बताते हैं, किसी भी बड़े आयोजन में वरिष्ठ पदाधिकारी ऐन वक्त में पहुंचते हैं और कार्यक्रम खत्म होते ही चले जाते हैं। ऐसे में स्थानीय कार्यकर्ता अपने नेतृत्व से न मिल पाने से मायूस रहते हैं। संघ प्रमुख हमेशा इसका ख्याल रहते हैं। इसलिए किसी भी संगठन के बड़े आयोजन में वह पहले ही पहुंचते हैं। अब चित्रकूट में अगले तीन दिन तक का समय वह सिर्फ स्थानीय कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों से मिलने में गुजारेंगे। पहले दिन आरोग्यधाम में लगी संघ की शाखा में प्रार्थना व ध्वज प्रणाम के साथ वह स्वयंसेवकों से मिले। उनका परिचय व हालचाल लिया। सेवाभाव की सीख देते हुए कुछ बातें भी कहीं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंदाकिनी स्नान करके भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि दी। जनसंघ संस्थापक डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को उनकी 120वीं जयंती पर याद किया। इससे पहले आरोग्यधाम में दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं ने संघ प्रमुख का भारतीय संस्कृति के अनुरूप हल्दी व रोली का तिलक कर स्वागत किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार सुबह छह बजे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से चित्रकूटधाम कर्वी रेलवे स्टेशन पर उतरे तो संघ पदाधिकारियों व प्रशासनिक अमले ने उनकी अगवानी की। पत्रकारों के सवालों पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। सिर्फ इतना कहा कि ‘अभी क्या बोलें-सात दिन रहना है।’ उनके आगमन को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम रहे। स्टेशन परिसर के बाहर पांच-पांच फीट की दूरी पर जवान तैनात रहे, जबकि आरोग्यधाम के प्रवेश मार्गों समेत रास्ते में भी कड़ा पहरा रहा।