कानपुर : तेंदुआ खेल रहा चूहे बिल्ली का खेल

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नहीं पकड़ में आया तेंदुआ एक महीने से भी ज्यादा समय बीत गया

अमृतांश बाजपेई/ निशंक न्यूज़

कानपुर शहर में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। गुरुवार के बाद शनिवार रात को भी आईआईटी में तेंदुआ देखा गया। इस दौरान यह परिसर में ही अलग-अलग जगहों पर करीब पौने तीन घंटे तक टहलता रहा। वन विभाग की टीम ने अब उसे रात में पकड़ने की योजना बनाई है।
इसके लिए कई जगहों पर जाल भी लगाए गए हैं। आईआईटी परिसर में लगे कैमरों में सबसे पहले तेंदुआ रात करीब एक बजे देखा गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार वह जंगल के एक से दूसरे पैच में जाते समय कई बार देखा गया। वह ऑडिटोरियम से लेकर रिहायशी क्षेत्रों के अलावा एयरस्ट्रिप पर भी गया। आखिरी बार 3:40 बजे उसे परिसर में बने आम के बाग में जाते देखा गया, इसके पीछे घना जंगल है।
शिकार के बाद टहलने आता है तेंदुआ
वन विभाग का मानना है कि तेंदुआ जंगल में शिकार करने के बाद रात के समय परिसर में टहलने आ रहा है। ज्यादातर ऐसा हुआ है कि जिस रास्ते से तेंदुआ एक बार निकला, उसी रास्ते से गया भी। ऐसे में अब उसके टहलने वाले क्षेत्र में जाल लगाए गए हैं। साथ ही तीन और नेट लेकर टीमें भी रात में गश्त करेंगी, ताकि उसे पकड़ा जा सके। उधर, रविवार को दिन में वन विभाग ने कर्मियों ने जंगल के अंदरूनी इलाकों में गश्त की तो पता चला कि वह पूरे परिसर में रात में घूम रहा है। उधर, तेंदुए के इतनी देर तक परिसर में टहलने की खबर से यहां रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है।
एनएसआई के गन्ने के खेत में लगाए दो पिंजरे
वन विभाग ने एनएसआई कैंपस से सटे गन्ने के खेत में दो पिंजरे लगाए हैं। इसके अलावा आईआईटी में लगे कैमरे की स्थिति को बदला गया है। अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए को आकर्षित करने के लिए एक अन्य तेंदुए के यूरिन को भी पिंजरों के आसपास डाला गया है। हालांकि इसके बाद भी तेंदुआ वन विभाग की पकड़ से दूर है।

प्रोफेसर घरों में कैद, कर्मचारियों ने छोड़ा आवास
ऑडिटोरियम और आईडब्लूडी के पास की सड़क पर तेंदुए की चहलकदमी का फुटेज आते ही प्रोफेसर परिवार समेत घरों में कैद हो गए हैं। कई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उनके परिवार आवास छोड़कर चले गए हैं। हालांकि संस्थान के सिक्योरिटी अफसर प्रो. जे रामकुमार ने इसका खंडन किया है। उनका कहना है कि तेंदुआ दिखा है, सबको सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, लेकिन कर्मचारियों के बाहर जाने की बात गलत है।