शुक्लागंज में पुलिस, किसानों में संघर्ष

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पुलिस को धक्का देकर किसानों ने तोड़ी जेसीबी

गांव वालों के पथराव सीओ समेत कई पुलिस कर्मी हुए घायल

– पुलिस ने किया लाठीचार्ज किसानों को दौड़ादौड़ा कर पीटा

प्रभात त्रिपाठी

निशंक न्यूज़

कानपुर/शुक्लागंज।

शनिवार की सुबह ट्रांस गंगा सिटी पर कब्जा लेने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम से किसान भिड़ गए। पुलिस को धक्का देते हुए आगे बढ़े किसानों ने जेसीबी मशीन और प्रशासनिक अफसर की कार तोड़ दी और जमकर हंगामा किया। किसानों का हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने भी लाठीचार्ज कर दिया। विरोध में ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव करना चालू कर दिया। इस घटना में सीओ सिटी समेत करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मी पत्थर लगने से जख्मी हो गए। पुलिस ने सैकड़ों ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और ट्रांस गंगा सिटी से दूर खदेड़ दिया।

कुछ दिन पहले सूबे की सरकार ने जिला प्रशासन को आदेश दिया था कि ट्रांस गंगा सिटी का निर्माण कराया जाए ताकि विकास को नया आयाम मिल सके। जिसे देखते हुए शनिवार को प्रशासन और पुलिस की टीम ट्रांस गंगा सिटी पहुंचकर जेसीबी से सड़क का कार्य करने लगी।

इसी दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लाठी डंडा लेकर मौके पर पहुंच गए व प्रशासन के सामने हंगामा करने लगे। महिलाओं और पुरुषों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले उनकी मांगों को पूरा किया जाए फिर यहां पर कार्य किया जाए। शासन के आदेश पर किसानों से कब्जा हटाने पहुंची टीम ने पहले ग्रामीणों को काम में बाधा न पहुंचाने की नसीहत दी। ग्रामीण नहीं माने तो मौके पर भारी मात्रा में पीएसी और पुलिस तैनात की गई। आंसू गैस के गोले मंगाए गए।

करीब 2:15 बजे पुलिस ने ग्रामीणों को अलर्ट किया और उनको खदेड़  लिया। विरोध में ग्रामीण भी पीछे नहीं हटे और उन्होंने पुलिस पर पथराव करना चालू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना चालू किया तो दहशत में आए गांव के लोग मौके से फरार हो गए।

पथराव में सीओ सिटी अंजनी कुमार राय और कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। पुलिस ग्रामीणों को ट्रांस गंगा सिटी से खदेड़ने में कामयाब रही। अभी भी गांव के लोग पुलिस पर निगाह गड़ाए हैं। इतिहास के तहत जिले के सभी थानों की पुलिस बुला ली गई है।

बोले डीएम—

किसानों को दिया जा चुका है मुआवजा: डीएम

डीएम देवेंद्र पांडेय का कहना है कि किसानों का जो मुआवजा था उसे दिया जा चुका है। एक नहीं दो बार उनको मुआवजा दिया गया है। उसके बाद भी किसान अपनी जिद पर अड़े हैं। प्रशासन के पास उनका कोई बकाया नहीं है। इसको लेकर शासन स्तर पर कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं है।

कैमरामैंन वेद गुप्ता