जय गंगा मइया….

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31 जनवरी को तट पर फिर मेला

सजाया जा रहा है बैराज स्थल को

शैलेश अवस्थी

इस जनवरी की आखिरी तारीख पर एक बार फिर गंगा सरकारी तंत्र का मेला जुटेगा। समागम में गंगा के अविरल और निर्मल पर बात होगी। इसके लिए गंगा बैराज और आसपास घाटों को सजाया जा रहा है। गंगा की पूजा होगी और राजनेताओं की अगवानी में पलक पांवड़े बिछाए जाएंगे।

2014 को नरेंद्र मोदी जब वाराणसी चुनाव लड़ने पहुंचे तो गंगा को निहार कर कहा था कि मुझे मां ने बुलाया है। इसे फिर अविरल-निर्मल बनाएंगे और प्रधानमंत्री बनने के बाद इस वादे पर अमल भी शुरू कर दिया। नमामि गंगे परियोजना पर काम शुरू हुआ। इसकी मार्केटिंग और पैकेजिंग करने में भी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही। 14 दिसंबर को नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्री और मुख्यमंत्री कानपुर के गंगा तट पर इकट्ठा हुए थे। वे मोटरवोट पर गंगा की सैर को भी निकले थे। इसके पहले सरकारी महकमा दिनरात तैयारी में जुटा था। हजारों क्यूसिक पानी कानपुर की गंगा के लिए बांधों से छोड़ा गया था, ताकि गंगा निर्मल दिखे।

इसी के साथ गंगा में गिर रहे डेढ़ दर्जन नालों का मुंह मोड़कर उन्हें अस्थायी टैप कर दिया गया था। सीसामऊ नाला बंद कर ही दिया गया था, तो वहां सेल्फी प्वाइंट बना दिया गया। मोदी जब मोटरवोट में सवार होकर निकले थे तो गुनगुनी धूप में गंगा सोने जैसी चमक और दमक रही थी। खूब तारीफ भी बटोरी अधिकारियों ने, लेकिन मोदी जाते-जाते अधिकारियों की कुछ कलई खुल ही गई। गंगा तट पर सीढ़ियां चढ़ते मोदी गिरते बचे। एक ऊंची सीढ़ी थी और वहीं यह हुआ। बाद में वह सीढ़ी दुरुस्त की गई।

मोदी के जाने के बाद गंगा का जलस्तर फिर गिरने लगा। यदा-कदा नालों का पानी भी वहां आता रहा। गंगा का वह रूप नहीं रह गया, जैसा मोदी ने 14 दिसंबर को देखा था। अब 31 जनवरी को बिजनौर और बलिया से गंगा यात्रा कानपुर आ रही है। समागम गंगा बैराज में होगा। लखनऊ से भी बड़ी भीड़ आएगी। कोई 10 हजार लोगों की भीड़ होगी, जिसके लिए पूरा सरकारी अमला जुटा है। गंगा की सफाई पर फिर तेजी दिखाई जा रही है। सचेत किया गया है कि किसी भी हाल में नाले का एक बूंद पानी भी गंगा तक न पहुंचे। अफसरों की टीम हर रोज तैयारी की समीक्षा कर रही है।

नरेंद्र मोदी ने कानपुर में एक महत्वपूर्ण बात कही थी कि गंगा को अर्थ से जोड़ा जाए। गंगा और गंगा तट रोजगार का बड़ा साधन बन सकते हैं। यह बड़ी बात है। यदि एसा हो गया तो बड़ी संख्या में लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। इसके लिए गंगा तटों का विकास किया जाए। उन्हें एसा रमणीक बनाया जाए कि लोग वहां पहुंचे। गंगा के पौराणिक, सामाजिक के साथ उसके आर्थिक महत्व को भी बताया जाए।

इसी के साथ सियासी समीकरण भी साधे जा रहे हैं। गाय औऱ गंगा पर यूपी सरकार का फोकस है। हिंदुत्व के एजेंडे को धार भी मकसद है। सीएए को लेकर भी केंद्र और सूबे की सरकार विपक्षी दलों पर आक्रामक है। दो साल बाद यूपी में भी विधानसभा चुनाव है। योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी और अमित शाह के विश्वासपात्र हैं। वे मेहनत भी कर रहे हैं। हर रोज किसी ने किसी शहर का दौरा करते हैं। विकास की नई परिभाषा लिखने की कोशिश कर रहे हैं। इस कड़ी में मेट्रो ट्रेन की योजना को आगे बढ़ाया है। लेकिन जब तक आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से छुटकारा नहीं मिलता और उस तक योजनाओं का लाभ ईमानदारी से नहीं पहुंचाया जाता, तब तक सब कुछ औपचारिकता ही लगता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं…।