कमलेश तिवारी हत्याकांड की सुई घूम रही है कानपुर के इर्दगिर्द ?

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विकास वाजपेयी
लखनऊ के चर्चित कमलेश तिवारी की परत दर परत खोलने के साथ हत्यारों की शीघ्र धरपकड़ के लिए पुलिस की सभी टीमें जबरदस्त हाथ पैर मारती दिखाई दे रही है। पुलिस की सभी टीमें इस बात का सुराग लगाने के लिए हर वो पहलू तलाश रही है जिसमे ये इनपुट मिल रहा है कि आखिर किस जगह से हत्यारों को कौन और किसलिए मदद कर रहा है।
इसी क्रम में पुलिस की एक टीम मुस्तैदी से कानपुर के रेलबाजार क्षेत्र में खोजबीन कर रही है कि आखिर किसने इन हत्यारों को मदद उपलब्ध कराई है। कानपुर शुरू से साम्प्रदायिक हिंसा के लिए अतिसंवेदनशील श्रेणी में आता है और उन लोगों की भी पहचान होती रही है जो साम्प्रदायिक तनाव के लिए स्लीपर सेल की तरह काम करते रहे है। इसी को देखते हुए संवेदनशील कमलेश तिवारी हत्याकांड के लिए गठित टीमों में से एक ने शहर में डेरा डाल दिया है और दोनों हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन के विषय मे जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ताबड़तोड़ बैठके की जा रही है। पुलिस ने रेलबाजार और स्टेशन के आसपास के घने इलाको में दो हत्यारोपियों के फोटो चिपकाए जा रहे है और लोगों से इस बारे में पूरी जानकारी एकत्र की जारही है । कि आखिर किसकी मदद से दोनों ने सिमकार्ड रेलबाजार की दुकान से खरीदा । पुलिस अधिकारियों का ये भी मानना है कि यदि शहर से इन दोनों को कोई मदद मिली थी तो क्या फिर से छुपने के लिए अशफाक और मोइनुद्दीन कानपुर आ सकते है।
अंतिम बार दोनों को शाहजहांपुर में स्टेशन रोड और अश्फाकनगर पुलिस चौकी रोड के पास एक सीसीटीवी फुटेज में पाया गया था जब ये स्टेशन पर ट्रेन की टाइमिंग का पता करने गए थे।
सूत्रों की माने तो इन दोनों शातिरों को गुजरात से एक फोन कॉल के बाद टैक्सी में पलिया से शाहजहांपुर के लिए रवाना किया गया था। पुलिस के अधिकारी इस बात पर भी मंथन कर रहे है कि कहीं इन दोनों को गुजरात से किसी तरह की मदद मिल रही है और क्या ये दोनों एक बार फिर उसी मदद के सहारे शहर में दाखिल हो सकते है। देश के बाहर जाने वाले रास्तों पर पहले ही कड़ी सुरक्षा कर दी गई है।